भावना योग का महत्त्व
सोहं इत्यात्त संस्कारात् तस्मिन् भावनया पुन:।
तत्रैव दृढ़ संस्कारात् लभते हि आत्मनि स्थितिम्।।
जो ध्यान है वह चित्त की एकाग्रता का नाम है और वहां तो यह कहा गया कि यदि तुम ध्यान की गहराई में डूबना चाहते हो तो ‘तुम कोई भी चेष्टा मत करो, कुछ बोलो मत, कुछ सोचो मत, आत्मा को आत्मा में स्थिर रखो; यही परम ध्यान है।’ शून्य भाव में पहुंच जाना, विचार शून्य, विकल्प शून्य, क्रिया शून्य, वह परम ध्यान है।
भावना योग की बात है, वह ध्यान नहीं है। वह एक अलग साधना, एक अभ्यास, एक ऐसा योग जिसके बल पर हम अपनी आत्मा का निर्मलीकरण कर सके, अपनी चेतना की विशुद्धि बढ़ा सकें।
- सुबह उठते ही ऊर्जावान दिन
- सोने से पूर्व शांतिपूर्ण नींद के लिये
- बच्चों के लिए भावना योग.
- गर्भवती महिलाओं के लिए
भावना योग: आत्मा के निर्मलीकरण का साधन
भावना योग की बात है, वह ध्यान नहीं है। वह एक अलग साधना, एक अभ्यास, एक ऐसा योग जिसके बल पर हम अपनी आत्मा का निर्मलीकरण कर सके, अपनी चेतना की विशुद्धि बढ़ा सकें।
भावना योग की पुस्तके
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भावना योग की बात है, वह ध्यान नहीं है। वह एक अलग साधना, एक अभ्यास, एक ऐसा योग जिसके बल पर हम अपनी आत्मा का निर्मलीकरण कर सके, अपनी चेतना की विशुद्धि बढ़ा सकें।





































































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भावना योग की बात है, वह ध्यान नहीं है। वह एक अलग साधना, एक अभ्यास, एक ऐसा योग जिसके बल पर हम अपनी आत्मा का निर्मलीकरण कर सके, अपनी चेतना की विशुद्धि बढ़ा सकें।
श्रद्धापूर्वक एवं नियमित प्रयोग से पहले सप्ताह से इसके लाभ प्राप्त होने लगते हैं।
- स्वास्थ्य, सोच, दिनचर्या आदि में लाभ की अनुभूति की है।
- संकल्प शक्ति एवं आत्म विश्वास में वृद्धि का अनुभव किया है।
- अपनी क्रोध, अहंकार, छल, लालच, ईर्ष्या जैसी भावनाओं पर लगाम लगा पाने में खुद को समर्थ महसूस किया है।
- अपनी सोच को नियंत्रित कर डिप्रेशन, चिंता, डर, अवसाद, एंग्जायटी से मुक्ति भी पाने में सफल हुए हैं।
- स्वास्थ्य सम्बन्धी तकलीफें जैसे कैंसर, अस्थमा, थायराइड, बीपी, हृदय रोग, नींद संबंधी विकार, टिनिटस और आत्महत्या की प्रवृत्ति से छुटकारा पाने में भी लाभ मिला है।
- हाल ही में इसके तीन माह तक नियमित प्रयोग से Cancer से पीड़ित महिला के जीवन में चमत्कारी सुधार आया - उनकी पीड़ा/ Pain कम हो गई और उन्होंने pain killers / दवाईआं लेना बंद कर दिया। इस self healing से उनके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य में इतना सुधार आया की उन्होंने शेष जीवन में इसका नियमित प्रयोग कर अपनी मृत्यु सुधरने (Art of Dying) का संकल्प लिया।
तो यदि भावना योग को प्रति दिन 30 minutes दोहराएंगे तो यह आपके बचे साढ़े 23 घंटे में आपको अलग ऊर्जा का अनुभव होगा जो आपको शांत व सकारात्मक बना आपके लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगी।
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भावना योग की बात है, वह ध्यान नहीं है। वह एक अलग साधना, एक अभ्यास, एक ऐसा योग जिसके बल पर हम अपनी आत्मा का निर्मलीकरण कर सके, अपनी चेतना की विशुद्धि बढ़ा सकें।
भावना योग की बात है, वह ध्यान नहीं है। वह एक अलग साधना, एक अभ्यास, एक ऐसा योग जिसके बल पर हम अपनी आत्मा का निर्मलीकरण कर सके, अपनी चेतना की विशुद्धि बढ़ा सकें। भावना योग की बात है, वह ध्यान नहीं है। वह एक अलग साधना, एक अभ्यास, एक ऐसा योग जिसके बल पर हम अपनी आत्मा का निर्मलीकरण कर सके, अपनी चेतना की विशुद्धि बढ़ा सकें।
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