त्यागी व्रतियों के लिए भावना योग

त्यागी व्रतियों के लिए भावना योग आत्मशुद्धि और संयम की साधना का सशक्त माध्यम है। शुद्ध भाव, समता और सजग चिंतन से किया गया भावना योग व्रतों की दृढ़ता बढ़ाता है। इससे राग-द्वेष की तीव्रता क्षीण होती है, कर्मबंधन शिथिल होते हैं और चित्त निर्मल बनता है। नियमित अभ्यास से त्याग, वैराग्य और करुणा के भाव गहरे होते हैं, जिससे साधक आत्मिक स्थिरता और भीतर की शांति का अनुभव करता है।

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भावना योग की बात है, वह ध्यान नहीं है। वह एक अलग साधना, एक अभ्यास, एक ऐसा योग जिसके बल पर हम अपनी आत्मा का निर्मलीकरण कर सके, अपनी चेतना की विशुद्धि बढ़ा सकें। वर्तमान में एक सिद्धांत विकसित हुआ ‘ला ऑफ अट्रैक्शन’ हमारे विचार साकार होते हैं, हम जैसा सोचते हैं जैसा बोलते हैं जैसी क्रिया करते हैं संस्कार हमारे सबकॉन्शियस में पड़ जाते हैं ।

भावना योग कोई भी कर सकता है यह किसी धर्म से नहीं जुड़ा अपितु कोई भी इसे अपने जीवन मैं उतर कर अपना जीवन सुखी और समृद्ध बना सकता है

भावना योग करने मैं कोई फिक्स समय नहीं है आप जितने समय करना चाहते हैं कर सकते हैं, अगर आप व्यस्त हैं तो अपने डेली जीवन मैं ५ मिनट्स मैं भी इसे कर सकते हैं |