पंच परमेष्ठि ध्यान
पूर्व दिशा की ओर मुख कर ले। अपने शरीर का हर अंग ढीला करे। सबसे पहले अपने शरीर के चारों ओर पंच परमेष्ठी के ध्यान के साथ क्रमश: सफेद, लाल, पीला, नीला और काले रंग का चक्र बनता हुआ देखें। ये कवच आपको सुरक्षित करेगा। शांत हो जाएं। धीरे-धीरे णमोकार मंत्र का जाप अपने मन में करे। अरिहंत परमेष्ठी के स्मरण के साथ भाव करे कि एक सफेद रंग का बहुत बड़ा गोला ब्रह्मांड से अरिहंत परमेष्ठी के सम्पूर्ण शक्ति को लेकर तुम्हारी तरफ बढ़ रहा है। देखें उस गोले को धीरे-धीरे वो गोला छोटा होता जा रहा है और महसूस करे कि वो गोला आपके आज्ञा चक्र पर स्थापित हो गया है। ठीक इसी प्रकार सिद्ध परमेष्टि का स्मरण करें और देखे एक लाल रंग का विशाल गोला, सिद्धों की वर्गणाओं को लेकर तुम्हारे भ्रमरंद पर स्थापित्त हो गया हो। आचार्य परमेष्ठी का ध्यान करें और देखें पीले रंग का विशाल गोला धीरे- धीरे छोटा होते हुआ कंठ पर विराज गया हो।
Frequently asked questions
भावना योग से जुढे सभी सवालों का जबाव आप को यहाँ मिलेंगे |
भावना योग की बात है, वह ध्यान नहीं है। वह एक अलग साधना, एक अभ्यास, एक ऐसा योग जिसके बल पर हम अपनी आत्मा का निर्मलीकरण कर सके, अपनी चेतना की विशुद्धि बढ़ा सकें। वर्तमान में एक सिद्धांत विकसित हुआ ‘ला ऑफ अट्रैक्शन’ हमारे विचार साकार होते हैं, हम जैसा सोचते हैं जैसा बोलते हैं जैसी क्रिया करते हैं संस्कार हमारे सबकॉन्शियस में पड़ जाते हैं ।
भावना योग कोई भी कर सकता है यह किसी धर्म से नहीं जुड़ा अपितु कोई भी इसे अपने जीवन मैं उतार कर अपना जीवन सुखी और समृद्ध बना सकता है
भावना योग करने मैं कोई फिक्स समय नहीं है आप जितने समय करना चाहते हैं कर सकते हैं, अगर आप व्यस्त हैं तो अपने डेली जीवन मैं ५ मिनट्स मैं भी इसे कर सकते हैं |
